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User Om Prakash Ratnaker

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Full Name: Om Prakash Ratnaker
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About: I am Om Prakash Ratnaker, research scholar in English from University of Allahabad. Doing research on Mahesh Dattani

Activity by Om Prakash Ratnaker

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!! उनके फ़िराक से वाकिफ़ न था !!

मुद्दतों बाद मिरे दिल के दहलीज़ के करीब
कोई शिरकत फ़रमाया है,
ज़माने गुज़र गये, पर कोई अज़ीज अजीब
शायद कोई फ़ुरकत में मिरे पास आया है.
रकीबों की बस्ती में, फिरा करता था मैं
यकीं था सब पर
मगर उनके फ़िराक से वाकिफ़ न था,
बेकल्लुफ़ से जीता था
मगर इत्तफ़ाक से वाकिफ़ न था.
आज नुमाईशों के भीड़ में मुझे कोई अपना बनाया है
ख्वाहिशों की दुनिया में इक सबब मिला,
चाहता रहा, फिर भी बेबश मिला.
नौबत ना आये किसी की, इस कदर जीने की
मुस्कान रहे होठों पर, फ़ुरसत न मिले गम-ए-अश्क़ पीने के,
आज बिन मयकदे के, जाम पी लिया मैंने
कोई दस्तक दिया इस कदर, बस यही ख़ुशी पा लिया मैंने,
यादों की बस्ती में, आग लगी है किससे कहूँ-
कि कौन आग लगाया है?
दर-ब-दर मैं फिरता रहा मारा- मारा,
अपने हबीबों से भी सहारा ना मिला,
ख़ामोश लबों को हम सिल भी सकते हैं
पर इस कदर कोई प्यारा ना मिला.
वफ़ा के चाहत में, आ गये रुस्वाइयों के कगार पर
महफ़िलों में जगह बनाता रहा,
पर संग हो लिए तन्हाईयों के दरकार पर.
रोता हूँ अब मैं सोचता हूँ,
कि वफ़ा कोई इस कदर आज़माया है
निशां भी नही मिलेगा,
यदि मिरी मय्यत जल गयी.
मनाये ना मानेगी, गर इक बार तमन्ना मचल गयी
होश में आओगे जब, सोंचेगें या रब
कोई मिरे यार को इस कदर ज़लाया है.
मुद्दतों बात मिरे दिल के दहलीज़ के करीब
कोई शिरकत फ़रमाया है.
ज़माने गुज़र...

Copyright (c) Om Prakash Ratnaker
Aug 1, 2016 by Om Prakash Ratnaker

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