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कहने को तो अभी बाकी है निशान उसके

पर दिल है नाशाद ये मानता ही नहीं

दिए हैं उसने जो सीने में हजारों जख्म

पर दिल है नादान ये जानता ही नहीं

करता है ऐतबार उसपे क्यूं खुद से ज्यादा

है इश्क़ का बुखार इसे मानता नहीं

कर रहा है वो खिलवाड़ दिल के साथ मेरे

पर नादान है दिल ये सब जानता नहीं

कर रहा है खुद से ज्यादा भरोसा उस पर क्यूं

पर मुहब्बत में दिल हारता मानता नहीं

commented by
Very well dear

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shared Jan 25, 2017 in Poem by Arthur
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