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भुलाने की कोशिश में उसको हम अपनों को भुला बैठे हैं

मनाने की कोशिश में अपनों को हम खुद को रुला बैठे हैं

सोचता हूं मिटा दूं खुद को पर अपने भी तो यार बैठे हैं

कर के ये तजुर्बा आज वो भी अपनों के साथ रहते हैं

हम दे रहे हैं खुद को क्यूं ये सजा उस बेवफा के लिए

वो हाथों में लगाकर मेहंदी अपने सज धज यार बैठे हैं

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