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रोज़ रात को कमरे से

शोर सुनाई देता है

चीख पुकारे मचती है

रोना धोना होता है

आती आती नींद

मुझे जगाकर खुद सो जाती है

दिन भर की खट्टी मीठी यादें

अँधेरे में खो जाती है

लड़ने की वजह कम है

मौके ज्यादा है

पुरानी बातें कुरेदने का

इनमे माद्दा है

कुत्तो के भौकने की आवाज़

भी बेहतर लगती है

रिश्ते प्यार परिवार की बातें

सब झूठी लगती है

लड़ाई में जो भी शब्द बोले जाते है

दिल में दिमाग में घर कर जाते है

ये शब्द अगली लड़ाई के लिए

हथियार बन जाते है

मां को चिल्लाने का बहाना मिल जाता है

पापा को पीने का बहाना मिल जाता है

बस मुझे इन रातो के बाद

जीने का बहाना नहीं मिलता

दिन सुधार जायेंगे

ये वहम पालना छोड़ दिया

जीने का कोई नया बहाना

हर रात ढूंढना छोड़ दिया
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NICE WELL WRITTEN....
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thanks a lot....
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Very well written..
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thanks a lot sir...
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!! Emotional..!!
such things happens with us too most of the time..!!!
commented by
thats true . everyone go through such phase in life on regular basis. thanks a lot...

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shared Jul 20, 2017 in Essay by Aakinchan jain
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