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माना गुनहगार है तेरे इश्क़ के, लेकिन,

हम से ही दुबारा मोहब्बत तो किजिए.

रह गयी है हसरतें, कई अधूरी मगर,

फिर किसी खिलौने की हसरत तो किजिए.

मंजिल मिल जाएगी, ठोकरें खाने के बाद,

हाथ उठाकर, ख़ुदा से इबादत तो किजिए.

कबसे कैद हैं तेरे यादों की क़फ़स में,

हमे रिहा करने की इनायत तो किजिए.

ना समझे कभी हम जज्बात तुम्हारे,

चलो हम से, इस बात की शिकायत तो किजिए.

बहोत कदूरत है ज़माने में मगर,

हमे ज़मीन से उठाने की रहमत तो किजिए.

माना गुनहगार है तेरे इश्क़ के, लेकिन,

हम से ही दुबारा मोहब्बत तो किजिए.
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Masha Allah bohot khub
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Bahot bahot shukriya Shagufta ji. Allah aapko barkat de.
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NICE POST BRO... REALLY AWESOME
TALENT KOOT KOOT KE BHRA HAI...
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Koi talent nahi hai bhai. Bas aisehi likh deta hun. Kuch humdard jo hai mere unhe achha lag jata hai.
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!! aji bhut hi bdiyaaa
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Aji, Bahot shukriya Ritika ji.
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Thank you.

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