This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+3 votes
21 views
shared in Short Story by
edited by

अनिल ने कोशिश की कि खुद को काम मे डुबो ले. और कुछ दिन ये काम किया भी. बस कुछ दिन… लेकिन गाड़ी बुरी तरह से टूट गयी थी. उसकी रिपेयरिंग होने तक उसे बस से ऑफिस जाना पड़ा.सच तो ये था की गाड़ी को देखते ही उसे अनिता याद आ जाती सो गाड़ी को वो घर लाना भी नही चाहता था.

बस मे खड़े हुए उसकी नज़र सामने के बच्चे पर पड़ी. उसने बहुत ही हल्के से सहारा ले रखा था. उसके हाथ मे एक कोक की बोतल थी. बच्चा बस में ही उसे खोल के पीने की कोशिश कर रहा था. सामने की सीट मे बैठी माँ उसे मना कर रही थी और अपने पास बुला रही थी पर एक  तो बच्चा ज़िद्दी था और दूसरा इतना छोटा भी नही की गोद मे बैठे.

तो वो बच्चा खड़ा होकर बोतल खोलने का यत्न कर रहा था. अनिल के मन मे अजीब सी चिढ़ मच रही थी और बच्चे की बेवकूफी उसे और गुस्सा दिला रही थी. तो उसने बच्चे के कंधे पे हाथ रखा

“सुनो बेटा, ऐसा मत करो. गाड़ी को झटका लगेगा तो  कोक गिर जायगा”. अनिल ने उसे बेटा तो कहा पर अन्दर से उसके मन में गुस्सा फूट रहा था.

पर लड़के ने बात अनसुनी कर दी. और सचमुच गाड़ी झटके से रुकी. और सारा कोक उसके पीछे खड़े अनिल पर छिटक गया.

बच्चे ने निराश स्वर से कहा “सॉरी अंकल”. सुनते ही अनिल के मन में पुरानी बाते तैर गया और बाहर छलक आई उसके अन्दर की भड़ास.

अनिल कुछ देर खामोश रहा फिर पीछे मुड़कर कुछ सोचते हुए कुछ कदम चला, लेकिन फिर तेज़ी से मुड़कर लड़के को थप्पड़ रसीद दिया और बोला- “सॉरी बेटा!!”

थोड़ी देर बाद अनिल उतर गया. कपड़े तो सूख गये पर दाग रह गया बाहर भी और अंदर भी.

next part

Related posts

+4 votes
0 replies 21 views
+3 votes
0 replies 23 views
+3 votes
0 replies 22 views
+4 votes
0 replies 29 views
+4 votes
0 replies 25 views
+4 votes
0 replies 20 views
+2 votes
0 replies 34 views
+4 votes
0 replies 41 views
Connect with us:
...