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सोने-हीरे से भी होते अनमोल सपने
इसको पूरा करने में साथ न देते अपने.....
खुद ही लड़ना पड़ता अपने सपनों की खातिर
कमजोर को भी हिम्मत देकर बनाती माहिर....
बंद आँखों के सपने होते सस्ते,खुले आँखों से निकलते नहीं रस्ते....
कोशिशों की घर्षण से निकलती तकलीफो की आग
फिर भी अंधेरों में नहीं दिखता उम्मीदों का कोई चिराग.....
सच कहती है वक्त की आवाज.,होते बहुत महंगे सपनों की झंकार
लेकिन क्या करें इन आँखों का,जो चाहे सुनहरे सपनों का होना साकार.....
कभी तो बादलों के पार उगेगा मेरे नाम का भी सूरज
सपनों की उड़ान मुस्कुराकर जीतेगी अपने हौसलो का धीरज।अनुगुंजा
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Superb lines... Very nice...
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Thank you so much

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