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कैसे कह दू, 

कि मुझसे मोहब्‍बत की थी उसने,

कैसे कह दू,

 मेरी वफाओं से वफा कि थी उसने ।

कैसे कह दू, 

दुआओं में मेरा नाम लि‍या था दि‍ल से,

कैसे कह दू, 

मुझसे दूर जाने को मजदबूरी नाम दि‍या था उसने ।।

कैसे, कैसे, कैसे कह दू कि‍ मुझसे  मोहब्‍बत की थी उसने...

वो मुझको बेवक्‍त फोन करना, उसका याद करना था

वो मुझको रात भर जगाना, उसका प्‍यार करना था

वो मेरे संग घूमना उसका, मेरे पास रहना था

कैसे कह दू,

ए-दोस्‍तो उसका इरादा साथ रहना था

कैसे कह दू, 

कि‍ मुझे बचपन की, सच्‍ची कहानी सुनाई थी उसने..

कैसे, कैसे, कैसे कह दू कि‍ मुझसे  मोहब्‍बत की थी उसने...

वो मेरी राह तकना उसका, मेरा इंतजार करना था

वो हर बार उसका तीन शब्‍द कहना, उसका इजहार करना था

वो दुसरो से छुप कर के देखना उसका, मुझसे नजरे मि‍लाना था

कैसे कह दू,

ए-दोस्‍तो, उसका इरादा दि‍ल मि‍लाना था

कैसे कह दू, 

कि‍ हर बार सहेलीयों से बातों में, मेरा जि‍क्र कि‍या था उसने

कैसे, कैसे, कैसे कह दू कि‍ मुझसे  मोहब्‍बत की थी उसने...

©अंशुल अग्रवाल©

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superb Anshul :) Loved it!
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Thank you Priya ji.
Aise to mai bahut kam likhta hu
So Help me and Give Me Some Suggestion
commented by
very well written... loved it...

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shared Dec 31, 2018 in Poem by Kagz de falsa
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