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कांटे होने के बावजूद पसंद गुलाब को ही करते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बेवफा होने के बावजूद उसकी यादों मे भी उसी को प्यार करते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
लाख भरोसा तोड़े लोग , फिर भी विश्वास कर ही लेते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
जब दिलदार रुठ जाये तो क्या मनाना छोड़ देते हो ?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बचपन मे जब एक बार गिरे थे तो दोबारा उठे भी तो थे,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बिना गिरे साइकिल आ गयी थी क्या?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
अमरुद के पेड़ से निचे गिरे थे एक बार याद है, तो क्या पेड़ पर चढ़ना छोड़ दिया?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई,
हर अमावस्या के बाद क्या चाँद नहीं निकलता,
हर रात के बाद क्या सूरज नहीं आता?
 तो फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
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Superb lines...
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yhi to mohbat hai yaara
well composed
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loved it....keep writing

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