This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+6 votes
109 views
shared in Poem by
कांटे होने के बावजूद पसंद गुलाब को ही करते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बेवफा होने के बावजूद उसकी यादों मे भी उसी को प्यार करते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
लाख भरोसा तोड़े लोग , फिर भी विश्वास कर ही लेते हो,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
जब दिलदार रुठ जाये तो क्या मनाना छोड़ देते हो ?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बचपन मे जब एक बार गिरे थे तो दोबारा उठे भी तो थे,
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
बिना गिरे साइकिल आ गयी थी क्या?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
अमरुद के पेड़ से निचे गिरे थे एक बार याद है, तो क्या पेड़ पर चढ़ना छोड़ दिया?
फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई,
हर अमावस्या के बाद क्या चाँद नहीं निकलता,
हर रात के बाद क्या सूरज नहीं आता?
 तो फिर जिंदगी से क्या दिक्कत है भाई।
commented by
Superb lines...
commented by
yhi to mohbat hai yaara
well composed
commented by
loved it....keep writing

Related posts

+5 votes
0 replies 76 views
+5 votes
0 replies 45 views
+5 votes
0 replies 55 views
+4 votes
0 replies 52 views
+2 votes
0 replies 45 views
+3 votes
0 replies 40 views
+4 votes
0 replies 33 views
+3 votes
1 reply 124 views
Connect with us:
...