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मुझ मे मैं भी हूँ ये आज पता चला...
साँस काफी नहीं जिंदगी जीने के लिए ये  आज पता चला..
लोग रेत की लहरो पर भी घर बनाते है, पर पानी की लहरों से भी घरोंदे ढहते है ये आज पता चला...
प्यार, इश्क़,मोहब्बत एहसास ये खुबसूरत है,
पर लोग फ़ना भी इस एहसास मे है ये आज पता चला.....
अपनों का तो अंदाज़ा था हमे 'ग़ालिब',
पर यहा अजनबी भी रुसवा होते है ये आज पता चला...
मुझ मे मैं भी हूँ ये आज पता चला...

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shared Dec 27, 2018 in Shayari by Krishna Ghorla
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