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तेरी याद को दामन मे भर
एक अंजान सफ़र की ओर चला
ना रास्ता पता ना ठौर ठिकाना
खुद ना जानू किधर चला

सारे जाग मे ढूँढा तुझको
बस आँखों मे पाया है
तू बेगैरत आया भी तो
बस सपनो मे आया है

खुली आँखों से ढूँढ रहा हूँ
हर गली और हर डगर
ना चिट्ठी तेरे आने की कोई
ना ही तेरी खोज खबर
तुझको ऐसे ढूँढा मैने
जैसे तू कोई खुदा का साया
तू ही खुदा से कम ना निकला
जन्मो बीते तू ना आया

तेरी यादो के सहारे
कट जाएँगे कुछ और जन्म
जानता हूँ पत्थर दिल तू
आएगी फिर भी ना सनम
एक दिन मेरी कब्र होगी
और तेरा फूल होगा
मरने पर ही शायद अब तो
ये रिश्ता तुझे कबूल होगा.
commented by
Beautiful poem...
commented by
thanks a lot gurjyot!!!

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shared Feb 23, 2016 in Poem by Snigdha Jha
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