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ताक ता रहता हूं मैं तुझे आती जाती को               
दिल से मेरे दिल तक तेरे एक राह निकलती है               
एक तू ही न जाने हम तुझे कितना चाहते हैं               
देख के तुझको दिल से मेरे आह निकलती है               
               
अजनाबियों की महफिल में अन्जान ही मिलते हैं               
मेरे दिल से तेरे दिल की लेकिन पहचान निकलती है               
जब मैं जांऊ तुझको कोई फर्क नही पडता               
जब तू जाती है लेकिन मेरी जान निकलती है               
               
मेरे यहां से सिर्फ वहां तेरी खिडकी दिखती है               
तेरी खिडकी से लेकिन पूरा जहान भी दिखता है               
तू कहती है तुझे वहां से चांद की झलक नही मिलती               
मेरे यहां से लेकिन केवल एक चांद ही दिखता है
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wahh wahh....
aakhri ke lavso ne to dil chu liya....
commented by
Shukriya.... Mohtarma.

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