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रामसिंह अपने घर के आंगन में चारपाई पर लैटा हुआ विचारों में कहीं ग़ुम था I अचानक उसकी नज़र आंगन के बाहर एक बरग़द के पेड पर गयी I वो पहले तो कुछ ग़मगीन हुआ फिर मुस्कुराया I उसकी इस खुशी और ग़म के पीछे एक गहरी सोच थी, वो दुखी इसलिये था के उसके दो बेटे हैं जिन्हे उसने बडे लाड प्यार और जतन से पाला था I सब कुछ ठीक था लेकिन एक दिन रामसिंह से एक ग़लती हो गयी के वो बुढा हो गया ये गलती हालांकि उसकी जानबूझ कर नही की हुई थी पर इसका ख़ामियाजा तो उसे ही भुगतना पडा था I जिन बच्चों को अब तक उसने अपने कंधों पर खेलाया था, जिनके लिये वो पूरी उम्र तक काम करता रहा I आज वो ख़ुद उन बच्चों के लिये बोझ हो गया था, दोनों बेटे बाप को पालने में असमर्थ महसूस कर रहे थे I यही उसके ग़म का कारण था I लेकिन बरग़द के साथ ऐसा कुछ नही था उसका कोई बेटा या रिश्तेदार नही था, जिनपे वो बोझ हो, इसलिये वो बरग़द को खुद से ख़ुशकिस्मत मान रहा था Iये पेड उसके बचपन का इक्लौता साथी था I

लेकिन उसी वक्त एक और जन विचारों में मग्न था, वो था वो पेड I वो भी ख़ुश भी था और ग़मगीन भी I ग़मगीन इसलिये की उसका एक पूरा परिवार था, उसके संगी साथी व अन्य रिश्तेदार I लेकिन उन सब को लोगों ने ईमारती इस्तेमाल के लिये काट डाला था I चूंकि बरग़द की लकडी कहीं इस्तेमाल नही होती इसलिये वो बच गया था I अपनों से दूरी का उसे ग़म था, लेकिन उसके मित्र रामसिंह के साथ परिवार था इसलिये वो अपने मित्र को खुद से ख़ुशकिस्मत मान रहा था I

दोनों ख़ुद को दुख़ी और दुसरे को सुखी मान रहे थे I लेकिन वो इस बात से अनजान थे की उन दोनों की "कथा" भी एक थी और "व्यथा" भी I उनके दुख का मुख्य कारण था कटाव, कटाव पेडों का और कटाव परिवार का I

अग़र इंसान और इंसानियात को बचाना है तो ये कटाव रोकना होगा I

किसी शायर ने सही कहा है दोस्तो:-

फ़ल न देता न दे ,
छाया तो देगा तुझको I
पेड बूढा ही सही ,
पर घर में लगा रहने दो I

Story by: Anil Sharma
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beautifully written...
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Thanks....Bhai Ji..
commented by
well penned.....
commented by
Thank you maam

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