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वही होने से डरता हूं जो होना चाहता हूं मै,

उसी को खोजता हूं जिसको खोना चाहता हूं मै,

बहुत जागा हूं गहरी नींद में सोना चाहता हूं मै,

जंमी अब तुझसे दो गज बिछौना चाहता हूं मै,

कभी बाहर निकलकर खुल के रोना चाहता हूं मै,

कभी रोने को घर का एक कोना चाहता हूं मै,

बहलता ही नही जी मेरा कुदरत के करिश्‍मों से,

खुदा से क्‍या पता कैसा खिलौना चाहता हूं मै

जहां से बच-बचाकर कश्तियां जा‍ति है साहिल तक,

वही पर अपनी कश्‍ती को डूबोना चाहता हूं मै,

समुन्‍दर को नही प्‍यासी जंमी को जो करे सरेबा,

कुछ ऐसे बादलो के बीज बोना चाहता हूं मै

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beautifully written...
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Thank you Gurjyot
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Beautiful ......Anshul Bhai

Just edit draftand ng error साहित to साहिल          in 4th line from last.
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Thank you Anil
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superb dear

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मैं भी तो तेरा नूर हूं
ये माना तुझसे दूर हूं
टूट कर तेरे अग़ोश में खोना चाहता हूं
या रब मैं तेरी गोद में सोना चाहता हूं
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Awesome creation sir
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ज़र्रानवाज़ी का शुक्रिया  !!!

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