This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+8 votes
134 views
shared in Poem by
edited by

वही होने से डरता हूं जो होना चाहता हूं मै,

उसी को खोजता हूं जिसको खोना चाहता हूं मै,

बहुत जागा हूं गहरी नींद में सोना चाहता हूं मै,

जंमी अब तुझसे दो गज बिछौना चाहता हूं मै,

कभी बाहर निकलकर खुल के रोना चाहता हूं मै,

कभी रोने को घर का एक कोना चाहता हूं मै,

बहलता ही नही जी मेरा कुदरत के करिश्‍मों से,

खुदा से क्‍या पता कैसा खिलौना चाहता हूं मै

जहां से बच-बचाकर कश्तियां जा‍ति है साहिल तक,

वही पर अपनी कश्‍ती को डूबोना चाहता हूं मै,

समुन्‍दर को नही प्‍यासी जंमी को जो करे सरेबा,

कुछ ऐसे बादलो के बीज बोना चाहता हूं मै

commented by
beautifully written...
commented by
Thank you Gurjyot
commented by
Beautiful ......Anshul Bhai

Just edit draftand ng error साहित to साहिल          in 4th line from last.
commented by
Thank you Anil
commented by
superb dear

1 Reply

0 votes
replied by
selected by
 
Best reply
मैं भी तो तेरा नूर हूं
ये माना तुझसे दूर हूं
टूट कर तेरे अग़ोश में खोना चाहता हूं
या रब मैं तेरी गोद में सोना चाहता हूं
commented by
Awesome creation sir
commented by
ज़र्रानवाज़ी का शुक्रिया  !!!

Related posts

+4 votes
0 replies 31 views
shared Nov 14, 2016 in Shayari by yes2arjun
+4 votes
0 replies 75 views
+12 votes
0 replies 291 views
+8 votes
0 replies 31 views
+7 votes
0 replies 76 views
+6 votes
0 replies 2.4k views
+5 votes
0 replies 35 views
shared Mar 21, 2016 in Poem by Nick Armbrister
+2 votes
0 replies 15 views
+1 vote
0 replies 16 views
Connect with us:
...