This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+5 votes
94 views
shared in Poem by
जुरर्त कर तू सपने देखने की ,
औकात की मत सोच ,
फैसला लिया जो तूने सुरज जलाने का ,
तो अंधेरी रात की मत सोंच ।
हुंकार भर तू गरजनों सी,
फाड दे समंदरों का सीना ,
उचाईयाँ हो सपनों की इतनी ,
उससे आगे हो कही कोई क्षितीज ना ।
जीत की जो ठान ली है ,
तो तू मात की मत सोंच ।
जुर्रत कर सपने देखने की ,
तू औकात की मत सोच ।
फर्क क्या है फिर
कोई साथ दे ना दे ,
पैर पीछे खीचे तेरे फिर कोई ,
संभलने को हाथ दे ना दे ।
तोड सारी बेडियो को ,
दौड जा तूफान के माफिक,
भटकना तो लाजमी है ,
रुक मगर ना , जो ना पाये मंजिल,
लक्ष्य भेदना है जो तुझको ,
तो तू किसी बात की मत सोच ।
जुर्रत कर सपने देखने की,
commented by
really motivational...
nice...yaaal...
just lov u poetries....
commented by
Thanks Ritika, really appreciated
commented by
Amazing... Really motivational!!!!
Loved it as usual!!!
commented by
Thanks alot Pranayee dear, really appreciated.
commented by
CLAPS! You deserve this appreciation...
commented by
thanks Priya, really appreciated

Related posts

+6 votes
0 replies 79 views
+17 votes
0 replies 248 views
+6 votes
0 replies 40 views
+3 votes
0 replies 16 views
shared Jul 28, 2018 in Poem by Riya
+5 votes
0 replies 23 views
shared Feb 13, 2017 in Poem by Juhi Gupte
+6 votes
0 replies 72 views
Connect with us:
...