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ये सारे समंदर ही होते शराब,
तो सोचो कैसा मंज़र होता...

बन जाये हक़ीक़त देखते हो जो सारे ख्वाब,
तो सोचो कैसा मंज़र होता...

उपरवाला ही जाने की किस के दिल में क्या है,
हो जाते सब के दिल बेनकाब,
तो सोचो कैसा मंज़र होता...

दुनिया मे है भी कुछ लोग भोलेभाले,
ना हो औरों के भी दिल में पाप
तो सोचो कैसा मंज़र होता....

बरसों से थे चुपचाप तभी तो निभा लिए दुनिया के हर रिश्ते,
अगर दिया होता सबको जवाब
तो सोचो कैसा मंज़र होता...

हम तो अच्छे रहकर भी लोगों की नज़र में बुरे बने रहे,
सचमुच के होते ख़राब
तो सोचो कैसा मंज़र होता...

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Wow!
Such an amazing write-up

Thank You for joining our YoAlfaaz family!
We welcome you here! :)
commented by
Thank you Priya.
commented by
superb post...
commented by
Thank you Gurjyot...

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