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मेरी आँखों की कश्ती के राही तुम हो 
कोरे कागज़ को भर दे वो स्याही तुम हो
तुम हो मेरे दिन का चैन रातो का अफसाना
काफिर को भी बदल दे वो खुदाई तुम हो
कडकडाती ठण्ड की रजाई तुम हो
प्यासे को पानी की सुराही तुम हो
अँधेरे कमरे में दीये की लौ की तरह
दिल को मीठा कर दे वो मिठाई तुम हो

जाने क्या जुड़ाव है जाने क्या लगाव है
हर ख्वाब पर भारी एक तुम्हारा ख्वाब है 
ये आकर्षण नहीं उन्माद नहीं न ये महज़ छलावा है
न मिथ्या न झूठ-फरेब न ये महज दिखावा है
एक चाहत है साथ रहने की
बिन कुछ कहे सब कहने की
हाथ पकड़कर साथ चलने की
व्यथित हुआ मन इतना जब आया
तुमसे बिछुड़ने का सवाल
और फिर अपने मन से
हमने पूछा ये सवाल 

अक्षरों में ख़ामोशी है
चाहकर भी कुछ कहा नहीं जाता
तुम्हारे मन में मेरे लिए 
क्या भाव है- अब रहा नहीं जाता
मेरी बेचैनी का इलाज अब तुम्हारे पास है
कह दो क्या ये प्रेम है या और कोई एहसास है.............

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ohhhh wow...
thats so sweet n loving...
just loved it....!!!!
:) touched
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bahut bahut shukriya aapka!!
commented by
Sir likha to Gajab hai but
jis se hum kahte
ab wo hi saath nahi hai
commented by
लाजवाब...... बेहतरीन..... इजहार...
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bahut dhanyawad anshul ji...

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