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क्यूँ आज तेरा काजल बिखरा हुआ सा लगता है,
रोई थी ये आँखे या खोई थी किसी के ख़यालो में,
क्यूँ तेरे कदम यूँ लड़खड़ाये से लगते है,
पड़े थे वो आज यार की गलियों में,
या मिले थे रूबरू अपने प्यार से,
धुँधली सी लगती है हर शामोशहर
धुँधली सी लगती है हर नज़र,
क्यूँ तेरे चहेरे से रोशनी ग़ायब लगती है,
आज ना तो मेरा इन्तकाल हुआ,
ना ही अमावस की रात लगती है,
क्या हुआ जो दिल आज बहेका हुआ सा लगता है।
©devika parekh
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What a liens :(
AWESOME
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super-amazing write up.....loved it!
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Superb post..

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shared Apr 19, 2018 in Shayari by arohiinayat
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