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फूलो से कलियों से

बहारो से जो खुशबू आती है

गलियों में आँगन में

घर में जो बहती  हवा सी है

रंगों में इन्द्रधनुष में

तस्वीरो में जो ताजगी है

सूरज में चंदा में

तारो में खिलती हुई जो रौशनी है

बारिश के पहले पानी में

जो ठंडक है फुहार है

कुछ कहा सा कुछ अनकहा

आँखों में जो प्यार है

सब मे तुम हो

फिर भी तुम

जाने कहाँ हो

हो खयालो में तो जिंदा

पर हकीक़त में कहाँ हो?

कभी शुन्य सा खाली मन

कभी खयालो से भरा हुआ

कभी ज़िन्दगी से भी जिंदा

कभी मौत से मरा हुआ

किताबो के हर पन्ने में हो

ग़ज़ल के हर शेर में

आशा के खालीपन में भी हो

और यादो के ढेर में

जहाँ सिर्फ मैं हूँ

वहां भी तुम हो

फिर भी न जानू

कहाँ पे तुम हो

जब आ ही चुके हो

तो कुछ ऐसे आ जाओ

कि कह सकूँ मैं

कि तुम ही मैं हूँ

और मैं ही तुम हो.....
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so sweet yaal....
so beautifully written
make me smile... :) :)
like your composition :) ;*
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thanks a lot!! your compliment made my day!! thanks again
commented by
penned well... liked it...
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thanks a lot!!
commented by
well penned....

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