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फ़ुर्सत मे ख़याल और भी होंगे

फुरक़त के इंतज़ाम और भी होंगे

कुद्रत मे आसमान और भी होंगे

चाँद सितारों के कारवाँ और भी होंगे

गुल्सितान मे गुलाब और भी होंगे

संगेंमरम्मर से एहसास और भी होंगे

शक्कर जैसे गाल और भी होंगे

खून से सुर्ख लाल लब और भी होंगे

मुझ जैसे, तेरे हमनवा, और भी होंगे

नज़रों से, हुए जो खाक, और भी होंगे

शबाब के अंदाज़, और भी होंगे

मेरे, खुलुस पे, बयान और भी होंगे

इश्क़ मे इम्तेहान और भी होंगे

मेरे जहेन मे शायद राज़ और भी होंगे

हमसे बढ़कर तेरे तलबगार और भी होंगे

हमसे बढ़कर फनकार और भी होंगे

रुका हूँ, तेरे अवतार और भी होंगे

खिदमत मे, आदाब और भी होंगे

रवानी मे खुलेआम हम भी होंगे

जवानी मे पिरी पे कलाम और भी होंगे

बैरी के इंतेकांम और भी होंगे

फाँसी के बाद इल्ज़ाम और भी होंगे

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kyaa khoob likhaaa hai...
ye qayanat bhi khi apki najami na ban jaye
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shukriya mehej taqaluuf hoga...

the way you adored it  is just awesome Ritika :)
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anytime... :) :)
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loved...loved...loved it!

Super-amazing
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Thank you Priya for your super-amazing comment :)
commented by
penned well...
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Thank you Gurjyot :)

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