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मिले उनसे कल परसों ही,
मिलते ही प्यार हो गया |
नज़रों का धोखा था या उनकी नज़र का असर,
एक पल में ही दिल बेकरार हो गया |

बेकरार मन सुनता मेरी भी नहीं,
दिल-ओ-दिमाग पर बस उनकी तस्वीर है |
उनका फैसला सर आँखों पर,
उनका फैसला ही अब मेरी तकदीर है |

समझते वो भी हैं,
नादां हम भी नहीं |
डर है थोड़ा दिल में मेरे,
ना कमबख्त ये टूट जाए कहीं |

कुछ अटकलें हैं,
कुछ कठिनाइयाँ हैं |
ख़ुशी तो बहुत है हमें,
पर थोड़ी अनहोनी की भी परछाइयाँ हैं | 

कशमकश में उनके जवाब की,
खुद को भुलाये बैठे हैं |
रहते तो हम मौजूद हर जगह हैं,
पर थोडा खोये खोये से रहते हैं |

आया वो दिन पास जब,
हवा में अलग सी सरसराहट थी |
खुल कर कह न पाए दिल की बात वो,
लगता है मन में उनके कहीं थोड़ी सी हिचकिचाहट थी |

©~KK~©
 

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very nice...
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too good....talented writer!

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