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मेने कहा, नहीं, ये नामुमकिन है. सायद तुम भूल सकती हो पर में नहीं, ये सिर्फ एक कहानी है, और तुम इस कहानी का एक चरित्र हो, मेरी कल्पना हो, इससे ज्यादा तुम और कुछ नहीं हो, हम कभी एक नहीं हो सकते। हम सिर्फ तब तक साथ है जब तक मेरी ये पेन न रुक जाये।

मेने कब कहा के तुम मुझे अपने वास्तविक जीवन में ले आवो, बस हमारी इस कहानी को ही कुछ इस तरह से लिखो की हम कभी अलग ही ना हो. पूरी ज़िंदगी हम एक दूसरे के साथ रहेंगे इसी तरह… (
रिया  ने कहा…)

कोनसी ज़िंदगी की बात कर रही हो तुम? तुम्हारी भी कोई ज़िंदगी है? तुम समझती नहीं हो, तुम्हारी कोई ज़िंदगी है ही नहीं, और न ही तुम इस ज़िंदगी में हो, सायद इस दुनिया हो पर सिर्फ मेरी किताब में और वो भी तब तक की  जब तक में लिखना बंध न कर दू.


तो फिर क्यों लाये तुम मुझे तुम्हारी दुनिया में? प्यार करना ही नहीं था तो फिर क्यों लिखी वो प्यारी बाते। मुझे तो ऐसा लगता था की जैसे हर वो बाते तुम करते थे वो सिर्फ मुझे पाने के लिए करते थे. और आज जब मुझे तुमसे प्यार हो गया, तुमने तो कहानी ही बदल दी. प्यार से इतना ही डरते हो तो क्यों किया प्यार? (रिया  ने कहा…) 

PART - 7>>

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wow..

how prettyyy

so beautifullyyyy written...

loved it..so much... :) :)
keep it up.. :*
commented by
Hey,

I'm glad you liked my story, Ritika :) It really meant a lot - thanks so much.
commented by
ye bhut hi pyarii hai sachii me... :) :)
commented by
Haa.. Sab esa hi kehte hai.. :D

btw would you like to listen same story in audio MP3 format? I'm sure you will like it too.  :)

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