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[फिर हमारी दोस्ती हो गई और हर सन्डे की शाम को हम मिलने लगे... धीरे धीरे कुछ महीनो के बाद हमारी दोस्ती और बढ़ गई और हम हर रोज़ मिलने लगे....]


अब तो ऐसा लग रहा था, की मुझे
रिया से प्यार होने लगा हो, सोचा की आज किसी तरह में उसे अपने दिल की बात बता ही दू.  फिर मेने अपने आप को संभाल लिया और सोचा की अमी मेरी कभी हो ही नहीं सकती, क्योकि अमी सिर्फ इस कहानी में है, जो कहानी में लिख रहा हु, और वो मेरी सिर्फ कल्पना है.

[इतनी देर में
रिया मेरे पास आई, और जो बात में न कह सका, उसने कह दिया।]

नितिन, रोज़ रोज़ तुमसे मिलके, तुम्हारी बाते सुनके आदत सी हो गई है, ऐसा लगता है की तुम्हारे बिना रहना मेरे लिए मुस्किल होगा, क्या हम सारी ज़िंदगी साथ रह सकते है? (रिया ने कहा…) 

PART - 6>>

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