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यार नितिन, तू कहानियाँ बहोत अच्छी लिखता है, कोई अच्छी सी कहानी हो तो प्लीज़ मुझे दे ना, मुझे एक शोर्ट फिल्म बनानी है. (वत्सल ने कहा)

उम्म्म्म् कहानी तो एक है, लेकिन ...

लेकिन क्या ? अरे ! कहानी अच्छी होनी चाहिए, तु क़ीमत बोल।  (वत्सल ने कहा)

मेरी कहानियाँ बिकावु नहीं है, मुझे कुछ नहीं चाहिए.. में बस चाहता हु की मेरी लिखी हुई कहानियां लोगो तक पहोचे, बस इससे ज्यादा मेरे लिए ख़ुशी की बात और कोई नहीं हो सकती।

फिर तो और अच्छी बात है , चल ला, किधर है ? (वत्सल ने कहा)

[मेने मेरी लिखी हुई एक कहानी की किताब वत्सल को दी, वत्सल ने पढ़ना शुरू किया.....]

============================Start===============================

हर सन्डे की तरह उस दिन में छत पे बैठ के डूबते हुवे सूरज की और देख रहा था , पता नहीं क्यों पर मुझे अच्छा लगता है . ..

सूरज जैसे डूबने ही वाला था , अँधेरा बस होने ही वाला था। . .इतनी देर में मुझे ऐसा लगा की मेरे आसपास कोई है. इधर उधर नज़र करके देखा तो पास वाली छत पे एक लड़की खड़ी थी। लड़की ऐसी जैसे कोई परी आसमान से उतर कर आई हो , हवा में उड़ते हुवे उसके रेशमी बाल। ...खुबशुरती की तो बात ही मत पूछो। ..

कुछ देर के लिए तो बस उसे देखता ही रहा  .. फिर उस लड़की ने हाथो से अपनी आखो से आंसू लुछे तो पता चला की ये तो रो रही है  ..


PART - 2 >>

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very nice...
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nyccc...:) :) :) :)

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