This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+6 votes
42 views
shared in Poem by
मैं कोई परछाई नहीं हूँ

अपितु अंधकार मैं अस्तित्व हीन सी,

मैं कोई तनहाई  नहीं हूँ

मैंने तेरी शक्ति बनकर

तेरा नाम बढाने को

अपनी शक्ति की थी समर्पित

तेरा अस्तित्व बनाने को

मैं ही तो थी सदा सहस्त्र सदियों से

तेरे पीछे तेरी ताकत बनकर

समर्पण की झूठी चादर ओडे

तेरा मान निभाने को

ऐकाकी में माँ सी ममता देकर

बेटा जैसा प्रेम किया

दुलार बहन सा देकर

भाई सा सम्मान दिया

अर्धांगिनी बनकर तेरी

कुल की गरिमा का मान किया

बेटी बनकर जब जनम लिया

तो पिता का गौरव थाम लिया

समर्पण की कीमत में जो मांगा

वो बस गरिमा की चाहत थी

जिस पर अपना जीवन बलिदान किया

उस से कुछ साँसें मागी थी

पर जिससे माँगा था सम्मान

उसने दामन तार तार किया

जिसने तुझको ताकत दी थी

तूने उसको असहाय मान लिया

बहुत हो गया अब तेरे जीवन के

पोषण में बलिदान

अब मैं खुद की शक्ति बनूँगी

गर्व से जीतूँगी खुद का सम्मान.......

© अंकिता चतुर्वेदी
commented by
Good , keep it up
commented by
very nice composition....good going
commented by
Thank u so much
commented by
Thank u so much , means a lot

Related posts

+7 votes
0 replies 91 views
+5 votes
0 replies 61 views
+3 votes
0 replies 21 views
+4 votes
0 replies 45 views
+5 votes
0 replies 74 views
+4 votes
0 replies 40 views
+4 votes
0 replies 45 views
+4 votes
0 replies 21 views
+5 votes
0 replies 91 views
Connect with us:
...