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सोचा न था ये दुनिया यु बदल जायगी
खुशियो के नाम पे फाटकों से जहा दूषित कर जायगी।
गुड़िया का इस दुनिया में आना हो या किसी पूजा या विसर्जन में जाना हो।।
फोड़ पटाखे हम खुशिया मानते।
पर इस खुसी में हम मानवता ही भूल जाते है।
आज मैं आप सब से करता हु बस एक सवाल
क्या केवल फाटके फोड़ के हम खुशिया मना सकते है।
क्या हम दीवाली में केवल दिए नहीं जला सकते।
गौर करो इस बात पे
फाटकों को ना कहो आज से
शोर धुँआ और बर्बादी ये सब एक साथ लाते है।।
चलो
एक बार ही सही बिना फाटकों के उजालो का त्यौहार दीवाली मानते है।।
इस दीवाली भारत को स्वतच्छता और हरियाली का उपहार दे जाते हैं ।
उपहार दे जाते है|| like n give your support #cracker free diwali
Amit
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Well explained.....
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Thanks sheela mam
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wow so well-written :)
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nice message for all... I'll try your poem to reach as many people as possible... ;)
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thanks priya mam n thanks you soo much gurjoyt_singh ji too
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Very well written!

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