This website is in read only mode. To be the part of New YoAlfaaz community, click the button.
+7 votes
75 views
shared by
सोचा न था ये दुनिया यु बदल जायगी
खुशियो के नाम पे फाटकों से जहा दूषित कर जायगी।
गुड़िया का इस दुनिया में आना हो या किसी पूजा या विसर्जन में जाना हो।।
फोड़ पटाखे हम खुशिया मानते।
पर इस खुसी में हम मानवता ही भूल जाते है।
आज मैं आप सब से करता हु बस एक सवाल
क्या केवल फाटके फोड़ के हम खुशिया मना सकते है।
क्या हम दीवाली में केवल दिए नहीं जला सकते।
गौर करो इस बात पे
फाटकों को ना कहो आज से
शोर धुँआ और बर्बादी ये सब एक साथ लाते है।।
चलो
एक बार ही सही बिना फाटकों के उजालो का त्यौहार दीवाली मानते है।।
इस दीवाली भारत को स्वतच्छता और हरियाली का उपहार दे जाते हैं ।
उपहार दे जाते है|| like n give your support #cracker free diwali
Amit
commented by
Well explained.....
commented by
Thanks sheela mam
commented by
wow so well-written :)
commented by
nice message for all... I'll try your poem to reach as many people as possible... ;)
commented by
thanks priya mam n thanks you soo much gurjoyt_singh ji too
commented by
Very well written!

Related posts

+7 votes
0 replies 44 views
+4 votes
0 replies 78 views
+3 votes
0 replies 35 views
+6 votes
0 replies 41 views
shared Feb 22, 2016 in Shayari by Amit Soni
+5 votes
0 replies 39 views
shared Feb 18, 2016 in Shayari by Amit Soni
+7 votes
0 replies 231 views
+6 votes
0 replies 40 views
+4 votes
0 replies 27 views
+4 votes
0 replies 35 views
+3 votes
0 replies 24 views
Connect with us:
...